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Jun 23, 2026 Soumya

निर्जला एकादशी व्रत के बाद कब करें पारण? जानिए शुभ समय और सही विधि

निर्जला एकादशी हिंदू धर्म के प्रमुख व्रतों में से एक मानी जाती है। व्रत पूर्ण होने के बाद पारण का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सही समय और विधि से पारण करने पर व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

निर्जला एकादशी व्रत के बाद कब करें पारण? जानिए शुभ समय और सही विधि
सनातन परंपरा में एकादशी व्रत को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। इनमें भी निर्जला एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। श्रद्धालु इस दिन बिना अन्न और जल ग्रहण किए भगवान विष्णु की आराधना करते हैं तथा सुख-समृद्धि और मोक्ष की कामना करते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार किसी भी व्रत की तरह निर्जला एकादशी का पारण भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जाता है जितना स्वयं व्रत। मान्यता है कि निर्धारित समय पर पारण करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है और भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है।

ज्योतिष एवं धर्माचार्यों के अनुसार एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि में किया जाता है। पारण के लिए शुभ मुहूर्त का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। निर्धारित समय के भीतर पारण न करने पर व्रत की धार्मिक प्रक्रिया अधूरी मानी जाती है।

पारण की पारंपरिक विधि
सुबह स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करें।
तुलसी दल अर्पित कर भगवान का स्मरण करें।
जरूरतमंदों को दान-दक्षिणा दें।
पारण से पहले जल ग्रहण करें।
इसके बाद सात्विक भोजन से व्रत का समापन करें।
भोजन में तामसिक पदार्थों से परहेज करने की सलाह दी जाती है।

धार्मिक ग्रंथों में वर्णित मान्यताओं के अनुसार निर्जला एकादशी का व्रत करने से वर्ष भर की एकादशी व्रतों के समान पुण्य प्राप्त होने की बात कही गई है। यही कारण है कि देशभर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस व्रत का पालन करते हैं।

धर्म विशेषज्ञों का कहना है कि व्रत के दौरान श्रद्धा, संयम और नियमों का पालन सबसे महत्वपूर्ण होता है। केवल उपवास ही नहीं बल्कि सकारात्मक विचार, दान-पुण्य और भगवान के स्मरण को भी व्रत का अभिन्न हिस्सा माना गया है।

हर वर्ष निर्जला एकादशी के अवसर पर मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। श्रद्धालु भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार सही विधि और उचित समय पर पारण करने से व्रत की पूर्णता मानी जाती है तथा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शुभ फल की प्राप्ति होती है।
Author - Soumya
Credit - Religion / Astrology Desk

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