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Jul 15, 2026 janta24x7news

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 आज से शुरू, जानें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त, धार्मिक महत्व और पूजा विधि

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई 2026 से शुरू हो गई है। इस दौरान मां दुर्गा और दस महाविद्याओं की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है। जानिए कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त, गुप्त नवरात्रि का धार्मिक महत्व, पूजा विधि और श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक जानकारी।

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 आज से शुरू, जानें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त, धार्मिक महत्व और पूजा विधि
आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई 2026, बुधवार से प्रारंभ हो गई है। यह पर्व 22 जुलाई 2026 तक चलेगा। सनातन परंपरा में गुप्त नवरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है। जहां चैत्र और शारदीय नवरात्रि में व्यापक स्तर पर मां दुर्गा की पूजा की जाती है, वहीं गुप्त नवरात्रि साधना, उपासना और आध्यात्मिक अनुशासन का विशेष पर्व मानी जाती है। इस दौरान देवी के विभिन्न स्वरूपों की आराधना के साथ-साथ कई साधक दस महाविद्याओं की उपासना भी करते हैं।

इस वर्ष गुप्त नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 8:02 बजे बताया गया है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार उस समय पुष्य नक्षत्र का प्रभाव रहेगा, जिसे शुभ कार्यों के लिए अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। श्रद्धालु इस मुहूर्त में विधि-विधान से घटस्थापना कर नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा-अर्चना कर सकते हैं।

गुप्त नवरात्रि का महत्व मुख्य रूप से आत्मिक साधना, संयम, जप, तप और देवी आराधना से जुड़ा माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पूजा से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है तथा व्यक्ति को मानसिक शांति और आध्यात्मिक बल प्राप्त होता है। कई साधक इस अवधि में विशेष मंत्रों का जाप, हवन और अनुष्ठान भी करते हैं।

दस महाविद्याओं में मां काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला की उपासना का विशेष महत्व बताया गया है। हालांकि सामान्य श्रद्धालु भी इस अवधि में मां दुर्गा की नियमित पूजा, दुर्गा सप्तशती का पाठ, देवी कवच और मंत्र जाप कर सकते हैं।

पूजा के दौरान स्वच्छता, सात्विक भोजन और संयम का विशेष ध्यान रखने की परंपरा है। श्रद्धालु लाल या पीले वस्त्र धारण कर माता को पुष्प, फल, दीप, धूप और नैवेद्य अर्पित करते हैं। कई स्थानों पर अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित करने और कन्या पूजन की भी परंपरा निभाई जाती है।

ज्योतिषीय दृष्टि से विभिन्न विद्वानों ने इस वर्ष विशेष ग्रह योग बनने की बात कही है। हालांकि ऐसे योगों और उनके प्रभावों को लेकर अलग-अलग ज्योतिषाचार्यों की अलग-अलग व्याख्याएं हो सकती हैं। इन मान्यताओं का आधार धार्मिक और ज्योतिषीय परंपराएं हैं, जिनकी वैज्ञानिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का मूल संदेश श्रद्धा, साधना, आत्मसंयम और सकारात्मक जीवन शैली अपनाने का है। श्रद्धालु अपनी परंपरा और आस्था के अनुसार पूरे नौ दिनों तक मां दुर्गा की उपासना कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।
Author - Janta24x7news
Credit - Janta24x7news

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