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Jul 15, 2026 janta24x7news

स्कूलों में व्यापक यौन शिक्षा लागू करने की तैयारी, सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने दी विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट

देश के स्कूलों में व्यापक यौन शिक्षा (Comprehensive Sex Education) को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने अहम कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट को सरकार ने बताया कि 26 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति अपनी रिपोर्ट सौंप चुकी है। फिलहाल इस विषय पर अंतिम निर्णय न्यायालय की आगे की कार्यवाही और सरकारी प्रक्रिया के बाद होगा।

स्कूलों में व्यापक यौन शिक्षा लागू करने की तैयारी, सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने दी विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट
देश के स्कूलों में व्यापक यौन शिक्षा (Comprehensive Sex Education) को पाठ्यक्रम में शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने जानकारी दी कि इस विषय पर गठित 26 सदस्यीय राष्ट्रीय विशेषज्ञ समिति अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप चुकी है। हालांकि, इसे अभी लागू नहीं किया गया है और आगे की प्रक्रिया न्यायालय के निर्देशों तथा सरकार के निर्णय के बाद ही आगे बढ़ेगी।

यह मामला किशोरों के अधिकारों, जागरूकता और बाल संरक्षण कानून (POCSO Act) से जुड़े मुद्दों के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र सरकार से स्कूलों में यौन शिक्षा को लेकर की गई तैयारियों की जानकारी मांगी थी।

सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव की अध्यक्षता में गठित 26 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर सौंप दी है। इस समिति में विभिन्न मंत्रालयों के अधिकारियों, शिक्षा विशेषज्ञों, मनोवैज्ञानिकों और अन्य विशेषज्ञों को शामिल किया गया था। समिति का उद्देश्य ऐसा व्यावहारिक ढांचा तैयार करना था, जिससे किशोरों को आयु के अनुरूप वैज्ञानिक, कानूनी और सुरक्षा संबंधी जानकारी उपलब्ध कराई जा सके।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने विशेष रूप से 15 से 18 वर्ष आयु वर्ग के किशोरों से जुड़े मामलों पर चिंता व्यक्त की। अदालत ने इस बात पर भी विचार किया कि किशोरों के बीच सहमति से बने संबंधों से जुड़े मामलों में कानूनी और सामाजिक पहलुओं को समझने के लिए जागरूकता आवश्यक है। इसी संदर्भ में व्यापक यौन शिक्षा को एक संभावित समाधान के रूप में देखा जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक और आयु-उपयुक्त यौन शिक्षा से बच्चों और किशोरों को शारीरिक विकास, व्यक्तिगत सुरक्षा, सहमति (Consent), लैंगिक सम्मान, ऑनलाइन सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और कानून से जुड़ी बुनियादी जानकारी मिल सकती है। इससे गलत सूचनाओं और भ्रांतियों को कम करने में भी मदद मिल सकती है।

पैरेंट्स एसोसिएशन और बाल अधिकारों से जुड़े कुछ विशेषज्ञों ने भी इस पहल का समर्थन किया है। उनका कहना है कि परिवारों में अक्सर ऐसे विषयों पर खुलकर चर्चा नहीं हो पाती, जिसके कारण किशोर कई बार अधूरी या भ्रामक जानकारी पर निर्भर हो जाते हैं। ऐसे में स्कूलों में प्रशिक्षित शिक्षकों के माध्यम से वैज्ञानिक और संतुलित जानकारी उपलब्ध कराना उपयोगी हो सकता है।

फिलहाल यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि देशभर के स्कूलों में सेक्स एजुकेशन अनिवार्य करने का अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है। केंद्र सरकार ने केवल यह जानकारी दी है कि विशेषज्ञ समिति अपनी रिपोर्ट सौंप चुकी है। अब इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई, सरकार की समीक्षा और संबंधित नीतिगत निर्णयों के बाद ही किसी नए पाठ्यक्रम या दिशा-निर्देश को लागू किया जाएगा।
Author - Janta24x7news
Credit - Janta24x7news

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