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Jul 13, 2026 janta24x7news

यूपी चुनाव 2027 से पहले सपा में बढ़ी अंदरूनी कलह, रुचि वीरा- कमाल अख्तर के बाद आनंद भदौरिया के बयान से मचा सियासी बवाल

समाजवादी पार्टी में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। रुचि वीरा और कमाल अख्तर विवाद के बाद अब सांसद आनंद भदौरिया के बयान ने पार्टी की सियासत को नया मोड़ दे दिया है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह गुटबाजी अखिलेश यादव की चुनावी रणनीति पर असर डालेगी?

यूपी चुनाव 2027 से पहले सपा में बढ़ी अंदरूनी कलह, रुचि वीरा- कमाल अख्तर के बाद आनंद भदौरिया के बयान से मचा सियासी बवाल
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी के भीतर बढ़ती गुटबाजी अब खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के बीच चल रही बयानबाजी और आपसी मतभेद विपक्ष की राजनीति में नई चर्चा का विषय बन गए हैं। ऐसे समय में जब सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव संगठन को मजबूत करने और 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) रणनीति के जरिए जनाधार बढ़ाने में जुटे हैं, वहीं पार्टी के भीतर से उठ रही असहमति उनकी चुनौती बढ़ाती दिखाई दे रही है।

हाल ही में सपा सांसद आनंद भदौरिया के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने राजनीतिक हलकों में नई हलचल पैदा कर दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में टिकट का फैसला केवल पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव करेंगे और किसी भी तरह की सिफारिश का कोई महत्व नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी जिस भी उम्मीदवार को मैदान में उतारेगी, वे पूरी निष्ठा के साथ उसे जिताने का प्रयास करेंगे।

आनंद भदौरिया का यह बयान ऐसे समय आया है जब मुरादाबाद की सांसद रुचि वीरा पहले ही पार्टी के कुछ नेताओं के खिलाफ खुलकर नाराजगी जता चुकी हैं। पीडीए कार्यक्रम में आमंत्रित न किए जाने को लेकर उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी और पार्टी नेतृत्व से कार्रवाई की मांग भी की थी।

रुचि वीरा और सपा नेता एसटी हसन के बीच विवाद के साथ-साथ कांठ से विधायक कमाल अख्तर के साथ भी राजनीतिक तनातनी की खबरें सामने आई थीं। सूत्रों के अनुसार, यह मामला पार्टी नेतृत्व तक पहुंचा और बाद में कमाल अख्तर ने विधानमंडल के मुख्य सचेतक पद से इस्तीफा भी दे दिया। इस घटनाक्रम ने यह संकेत दिया कि संगठन के भीतर मतभेद केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से पहले यदि पार्टी के भीतर समन्वय और अनुशासन बनाए रखने में सफलता नहीं मिलती, तो इसका असर आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर पड़ सकता है। हालांकि समाजवादी पार्टी की ओर से लगातार संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने की बात कही जा रही है।

फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि सपा नेतृत्व इन अंदरूनी मतभेदों को किस तरह सुलझाता है और क्या पार्टी चुनाव से पहले पूरी तरह एकजुट होकर मैदान में उतर पाएगी। आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर होने वाले फैसले उत्तर प्रदेश की राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
Author - Janta24x7news
Credit - Janta24x7news

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